बोध व्यंग्य और सम्वेदना की त्रिवेणी है लघुकथा – गिरीश पंकज

भोपाल.Desk/ @www.rubarunews.com- बोध व्यंग्य और सम्वेदना की त्रिवेणी है लघुकथा ,व्यंग्य करुणा की कोख से जन्मता है और यह व्यंग्य लघुकथा का आभूषण है यह उदगार हैं वरिष्ठ व्यंग्यकार लघुकथा लेखक श्री गिरीश पंकज के जो लघुकथा शोध केंद्र भोपाल और अपना प्रकाशन के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित पुस्तक पखवाड़े के अंतर्गत वरिष्ठ साहित्यकार श्री गौकुल सोनी के सद्य प्रकाशित लघुकथा सँग्रह ‘ अपने अपने समीकरण ‘ पर केंद्रित विमर्श में कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए अपनी बात रख रहे थे | इस अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में बोलते हुए वरिष्ठ कथाकार श्री मुकेश वर्मा ने कहा कि-‘ कम शब्दों में अधिक कहना ही लघुकथा सृजन की चुनौती है आने वाला समय लघुकथा का है पाठकों की कसौटी पर लघुकथाकारों को खरा उतरना होगा ,अन्यथा अधकचरी लघुकथाएं विधा का अहित ही करेंगी | पुस्तक केंद्रित विमर्श में भाग लेते हुए वरिष्ठ लघुकथाकार और लघुकथा शोध केंद्र की निदेशक कांता रॉय ने कहा कि ‘ इस संग्रह की लघुकथाएं एक आदर्श प्रकाश स्तम्भ की तरह प्रकाशमान हैं ,लघुकथाकार के व्यक्तित्व में जितनी सरलता है उनके कृतित्व में उतनी ही वक्रता है | विशिष्ट वक्ता के रूप में बोलते हुए वरिष्ठ लघुकथाकार श्री सतीश राठी ने कहा कि-‘ गौकुल जी की लघुकथाएं नेपथ्य को के पीछे घटित होने वाली घटनाओं को सामने लाती हैं ,वे गहरे पैठ कर लघुकथाओं के मोती चुनकर लाते हैं |’ कार्यक्रम का संचालन घनश्याम मैथिल’अमृत,’ ने किया | कार्यक्रम में लेखक गौकुल सोनी ने उपस्थित अतिथि वक्ताओं व उपस्थित मित्रों का ह्रदय से आभार प्रकट किया इस कार्यक्रम में डॉ भगीरथ परिहार ,मुजफ़फर इकबाल सिद्दीकी, डॉ वर्षा ढोबले ,अशोक धमेनिया, कर्नल डॉ गिरजेश सक्सेना, चित्रा राणा राघव, डॉ मौसमी परिहार, डॉ राजेश श्रीवास्तव , डॉ रंजना शर्मा , शेख शहज़ाद उस्मानी, मनोरमा पन्त, मधुलिका सक्सेना, मृदुल त्यागी,अंतरा करवड़े, आनन्द तिवारी, बालकृष्ण नीमा ,पवन जैन ,जया आर्य ,सहित अनेक साहित्यकार और पुस्तक प्रेमी मित्र उपस्थित थे |

Umesh Saxena

I am the chief editor of rubarunews.com