आज की रात अमृत बरसाएंगे चन्द्रदेव- प्रकृति से जुड़ा है शरद पर्व

श्योपुर. @www.rubarunews.com- सनातन धर्म संस्कृत्ति मे जन-जन को प्रकृति से जोड़ने वाले अनेक पर्व हैं। जिनमे अग्रणी है शरद पूर्णिमा का पर्व, जो आज 30 अक्टूबर को मनाया जा रहा है। शारद ऋतु की अगवानी की मूल भावना से जुड़ा है। मान्यता है कि शरद पूर्णिमा की रात भगवान चन्द्रदेव अपनी धवल किरणों से धरती पर अमृत वर्षा करते हैं। इसी मान्यता के अनुसार सांध्यकाल में खीर बनाकर मध्यरात्रि तंक खुले आसमान के नीचे रखी जाती है। जिसे बाद में ठाकुर जी को भोग लगाकर नैवेद्य के रूप में ग्रहण किया जाता है। माना जाता है कि चन्द्रदेव की अमृतमयी किरणों के संपर्क में आई खीर आरोग्य और उत्तम नेत्र ज्योति प्रदान करती है। देवालयों में ठाकुर जी की प्रतिमाओं को श्वेत वस्त्र धारण करा कर
खुले आकाश के नीचे विराजित किया जाता है। इस अवसर पर भजन संकीर्तन के विशेष आयोजन भी किए जाते हैं। कुछ संस्थाएं शारद उत्सव भी विगत वर्षों में आयोजित करती रही हैं। जो अब एक भूली बिसरी परंपरा बन चुके हैं। इस बार पर्व के उल्लास पर महामारी की मार है। ऐसे में उत्सव के सामान्य विधानों का पालन भी संभव नहीं माना जा रहा।