प्रत्येक मानव में होती हैं दो प्रकार की बुद्धि – आत्माराम जी महाराज
बूंदी.KrishnakantRathore/ @www.rubarunews.com- परम पूजनीय श्री आत्माराम जी महाराज बड़ा रामद्वारा के पीठाधीश्वर द्वारा भागवत कथा के चतुर्थ दिवस पर भागवत के प्रसंग का विस्तार पूर्वक वर्णन करते हुए बताया प्रत्येक मानव के भीतर दो प्रकार की बुद्धि होती है, एक सुरुचि एक सुनीति। जब हम सज्जनों संतो आध्यात्मिक महापुरुषों की संगत करते व कथाओं का श्रवण करते हैं तो हमारे भीतर सुनीति यानी की अच्छी विचारधारा प्रकट होती है।कथावके चौथे दिवस आत्माराम जी महाराज ने भागवत में परमहंसों की महिमा का गुणगान करते हुए जड़ व्रत का आख्यान में बताया कि हमारे बूंदी में भी दो संत महापुरुष हुए जिनका नाम परमहंस महंत श्री श्री 1008 श्री नृसिंह दास जी महाराज व उनके शिष्य परमहंस महंत श्री श्री 1008 श्री बजरंग दास जी महाराज लाल लंगोट वाले बाबा वह भी परमहंस की अवस्था में पहुंचे हुए और निर्भीक निडर और एक कर्मनिष्ठ महात्मा हुए। हइन्होंने व्यास पीठ से नरसिंह दास जी महाराज नरसिंह आश्रम और बाबा लाल लंगोट वाले महाराज श्री की समाज के प्रति उनके योगदान का विस्तार पूर्वक वर्णन किया।
महाराज ने कहा कि भागवत हमे जीवन जीने की तरीका सिखाती है। हमे संसार में रहते हुए भागवत के अनुरूप जीवन जीना चाहिए हमें क्रोध रूपी राक्षस से बचना चाहिए क्रोध हमारी बुद्धि को नष्ट कर देता है जो भगवान पर आश्रित है उनकी व्यवस्था भगवान स्वयं करते हैं ,उनका सब कार्य भगवान करते है।
रविवार को कथा में बूंदी नगर परिषद सभापति सरोज अग्रवाल, पूर्व सभापति मधु नुवाल, भूपेंद्र शास्त्री, राजेश शर्मा गांवगुरु ओम प्रकाश शर्मा सुल्तानपुर, पंडित रामचंद्र, श्याम शर्मा लाखेरी, परमाणु ऊर्जा विभाग रावतभाटा से राजेश राजीव शर्मा, तरेश कुमार यादव महाप्रबंधक उत्तम छाजेड़, देवेंद्र शर्मा का स्वागत व अभिनंदन किया। इस अवसर पर पर कैलाश शर्मा एवं राजेंद्र प्रसाद शर्मा द्वारा भागवत कथा प्रेमियों का आभार व्यक्त किया गया।
