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बूंदी के जंगलों में 6 साल से अकेले बाघ की सल्तनत

बूंदी.KrishnakantRathore/ @www.rubarunews.com- रामगढ़ विषधारी टाइगर रिजर्व के पूरे जंगल में अपनी टेरेटरी बना चुका 10 वर्षीय बाघ आरवीटी-1 अन्य नर बाघों को यहां बसाने की संभावनाओं पर भारी पड़ रहा है। यह बाघ साढ़े तीन साल की उम्र में ही रणथंभौर से खुद चलकर बूंदी के जंगलों में आ गया था और टाइगर रिजर्व बनने के पहले से ही यहां एक छत्र सल्तनत बनाए हुए है। वन विभाग ने एक साल पहले सरिस्का टाइगर रिजर्व से बाहर निकले युवा बाघ को रामगढ़ में छोड़ा लेकिन उसे पहले से मोजूद इस बाघ ने टेरेटरी की जंग में मार डाला। कोटा चिड़ियाघर से फिर से जंगलों के अनुकूल बनाने के लिए लाया गया युवा बाघ 14 माह से रामगढ़ के शॉफ्ट एनक्लोजर में कैद होकर रह गया है। 5 युवा बाघिनों की मौजूदगी वाले इस इस तेजी से उभरते टाइगर रिजर्व को एक नए युवा बाघ की आवश्यकता है। गौरतलब है कि मेज नदी किनारे टेरेटरी बना चुकी आरवीटी-5 व आरवीटी-6 इसी बाघ की बेटियां हैं ऐसे में इनब्रीडिंग का खतरा है। साथ ही मध्यप्रदेश से लाई गई बाघिन आरवीटी-9 व रणथंभौर की बाघिन आरवीटी-8 ने भी इस बाघ से लगातार दूरी बना रखी है।

बाघों का कुनबा बढ़ने के साथ बढ़ेगी समस्या

यह टाइगर रिजर्व 1501.89 वर्ग किलोमीटर के साथ राज्य का सबसे बड़ा टाइगर रिजर्व है लेकिन वन विभाग अब तक केवल 225 वर्ग किलोमीटर वाले कोर-1 को ही बाघों के अनुकूल बनाने में लगा हुआ है जिसमें भी आठ गांव बसे हुए हैं। बूंदी जिले के चंबल घड़ियाल अभयारण्य का हिस्सा कोर-2 है जो बाघों के अनुकूल नहीं है ऐसे में कालदां बफर जोन में नए बाघ बसाने की आवश्यकता है। उम्मीद है कि जल्दी ही वन महकमा व एनटीसीए की टीम इस ओर ध्यान देगी तथा बाघों के लिए नए आश्रयस्थल विकसित होंगे।