संस्कृति के रंग तीज त्योहारों के संग उमंग लहरिया फोटो कॉन्टेस्ट के परिणाम घोषित
बून्दी.KrishnakantRathore/ @www.rubarunews.com-भारतीय संस्कृति और तीज-त्योहारों की पारंपरिक छटा को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से उमंग संस्थान द्वारा आयोजित “उमंग लहरिया फोटो कॉन्टेस्ट” के परिणाम शनिवार को घोषित कर दिए गए हैं। प्रतियोगिता में बड़ी संख्या में प्रतिभागियों ने उत्साहपूर्वक भाग लेकर लहरिया परिधान के माध्यम से राजस्थान की समृद्ध सांस्कृतिक परंपरा को खूबसूरत तस्वीरों में प्रस्तुत किया। संस्थान द्वारा जारी परिणाम में कोटा की अंजली शर्मा ने बाजी मारी व विजेता बनी वहीं प्रतियोगिता में कोटा की श्वेता व्यास व बूंदी की खुशबू कोठारी ने संयुक्त रूप से द्वितीय स्थान प्राप्त किया । निर्णायक मंडल द्वारा विशिष्ट प्रस्तुति के रूप में हंसा कलवार कोटा, सुकृति शर्मा हिंडोली बूंदी तथा यशस्विनी कंवर, ओड़व, गुजरात के साथ सांत्वना पुरस्कार हेतु बूंदी की प्रीति हाड़ा, मांगरोल बारां की चार्वीं माहेश्वरी तथा कोटा की स्वाति मंगल का चयन किया गया।
उमंग संस्थान की अध्यक्ष डॉ. सविता लोरी ने परिणामों को ऑनलाइन जारी करते हुए कहा कि तीज-त्योहार भारतीय संस्कृति की आत्मा हैं। ये न केवल धार्मिक और सांस्कृतिक मूल्यों को सुदृढ़ करते हैं, बल्कि सामाजिक, भावनात्मक और आर्थिक जीवन को भी समृद्ध बनाते हैं। उन्होंने कहा कि लहरिया फोटो कॉन्टेस्ट का उद्देश्य युवा पीढ़ी को पारंपरिक परिधानों और त्योहारों की सांस्कृतिक महत्ता से जोड़ना था, जिसमें प्रतिभागियों ने अत्यंत रचनात्मक और आकर्षक तस्वीरें भेजीं। समन्वयक कृष्णकांत राठौर ने बताया कि इस आयोजन के माध्यम से उमंग संस्थान ने तीज-त्योहारों की सांस्कृतिक विरासत को नई पीढ़ी तक पहुँचाने का प्रयास किया है, जिसकी सामाजिक और सांस्कृतिक क्षेत्र में व्यापक सराहना रही है। उन्होंने बताया सभी विजेताओं को महिला दिवस पर आयोजित समारोह में सम्मानित किया जाएगा।
यह रहे निर्णायक
कॉन्टैक्ट संयोजक अनुराधा जैन ने बताया कि तोषनीवाल सारीज द्वारा प्रायोजित आयोजन में संस्कृति के रंगों से भरी एक से बढ़कर एक प्रस्तुतियों को प्रतियोगिता के निर्णायक मंडल द्वारा निष्पक्ष अंकन से परिणाम में बदला। प्रतियोगिता के निर्णायक के रूप में संयुक्त अरब अमीरात से आध्यात्मिक कार्यकर्ता भावना गोस्वामी, गुजरात से मेकअप आर्टिस्ट मोनिका एम चौहान, उत्तराखंड से शिक्षा संस्कृति विशेषज्ञ निशा रावत तथा नई दिल्ली से सामाजिक कार्यकर्ता कमल सक्सेना की महत्वपूर्ण भूमिका रही।
