जल है तो कल है: फिल्म देखकर स्कूली बच्चों ने जानी पानी की कीमत, खुद किया वाटर ऑडिट

रूडिप की अधिशाषी अभियंता सोनम शर्मा के निर्देशन में हुए इस कार्यक्रम का उद्देश्य भावी पीढ़ी को जल संकट के प्रति सचेत करना था। सहायक सामाजिक विकास विशेषज्ञ सचिन मुदगल ने छात्रों से संवाद करते हुए कहा, “हम यह भूल जाते हैं कि पृथ्वी पर उपयोग करने योग्य पानी केवल एक प्रतिशत है। यदि हमने आज ध्यान नहीं दिया, तो कल हमारे लिए जल संकट एक विकराल समस्या बन जाएगा।” उन्होंने बताया कि शहर में जल्द ही शुरू होने वाली नई जल प्रदाय योजना से हर घर को मीटर युक्त कनेक्शन के साथ पर्याप्त दबाव से पानी मिलेगा, लेकिन इस सुविधा का सम्मान करना और पानी व्यर्थ न बहाना हमारी सामूहिक जिम्मेदारी है।
छात्रों ने किया वाटर ऑडिट, साझा किए अनुभव
आकर्षक हिस्सा छात्रों द्वारा किया गया जल अंकेक्षण रहा। विद्यालय के 10 छात्र-छात्राओं ने टीम बनाकर स्कूल के पीने के पानी के नलों और शौचालयों का निरीक्षण किया। उन्होंने यह जांचा कि कहीं कोई नल लीक तो नहीं हो रहा है या बेवजह पानी तो नहीं बह रहा है। इसके बाद इन छात्रों ने अपने अनुभव अपने सहपाठियों के साथ साझा किए, जिससे अन्य विद्यार्थियों को भी व्यावहारिक रूप से जल संरक्षण की सीख मिली। इस दौरान सोशल सैफगार्ड नरेश महावर ने छात्रों को दैनिक जीवन में पानी बचाने के छोटे-छोटे लेकिन प्रभावी उपाय भी बताए।
विद्यालय के डायरेक्टर अर्पित रावत ने इस कार्यक्रम को सराहनीय और ज्ञानवर्धक बताते हुए कहा, “इस तरह की गतिविधियाँ बच्चों के लिए अत्यंत आवश्यक हैं। आज मिली सीख को बच्चे केवल अपने तक सीमित न रखें, बल्कि अपने परिवार और दोस्तों को भी इसके लिए प्रेरित करें।”
कार्यक्रम में अध्यापक राजू प्रजापत,रिया जैन,प्रियंका तथा सोशल आउटरीच टीम से बबिता, निकिता और सौरव शर्मा ने भी महत्वपूर्ण सहभागिता निभाई।
कार्यक्रम में अध्यापक राजू प्रजापत,रिया जैन,प्रियंका तथा सोशल आउटरीच टीम से बबिता, निकिता और सौरव शर्मा ने भी महत्वपूर्ण सहभागिता निभाई।