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गुरु भक्ति है शिष्य के जीवन की पहचान – गणिनी आर्यिका विज्ञाश्री माताजी

बूंदी.KrishnakantRathore/ @www.rubarunews.com-जैन चौगान हाल मे प. पू. भारत गौरव सहस्त्रकूट विज्ञातीर्थ प्रणेत्री श्रमणी गणिनी आर्यिका रत्न 105 विज्ञाश्री माताजी ने  उपस्थित जनसमूह को संबोधित करते हुए कहा कि* -: जीवन में यदि गुरु नहीं तो जीवन शुरू नहीं । गुरु की महिमा शब्दों में बता पाना बहुत मुश्किल है । गुरु भक्ति शिष्य के जीवन की पहचान होती है । यदि गुरु के प्रति समर्पण है भक्ति है तो उसका विकास है । अन्यथा निश्चित रूप से उसका पतन है । अतः शिष्य हो या श्रावक समूह उन्हें गुरु के प्रति कर्तव्य निष्ठा का पालन करते हुए आगे बढ़ने का प्रयास करना चाहिए । जितनी अधिक गुरु भक्ति होगी उतना ही कल्याण का मार्ग प्रशस्त होगा। यदि रंगना ही है जीवन में तो गुरु नाम गुरु भक्ति का ऐसा रंग  चढ़ाओ कि उतरना मुश्किल हो ।
पूज्य माताजी का उपवास के बाद निर्विघ्न पारणा संपन्न करवाने का अवसर महिला मंडल बूंदी ने प्राप्त किया। मुनि व्यवस्था समिति संयोजक संजय पाटनी ने बताया कि प्रवचन से पूर्व रिषभ नोसंदा,योगेन्द्र कासलीवाल ने दीप प्रवज्जलन कर कार्यक्रम की शुरुवात किया। मंगलाचरण अनिला पाटनी,एकता कासलीवाल ने किया। पूज्य माताजी ससंघ का शाम 4 बजे चौगान मंदिर जी से तालेड़ा की ओर मंगल विहार किया।