पं. माधव राव सप्रे की स्मृति में निबंध प्रतियोगिता आयोजित की जाएगी: मुख्यमंत्री श्री चौहान

भोपाल.Desk/ @www.rubarunews.com>> मुख्यमंत्री  शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि निष्काम कर्मयोगी पं. माधव राव सप्रे के व्यक्तित्व और कृतित्व पर प्रदेश की उच्चतर माध्यमिक शालाओं और महाविद्यालयों में निबंध प्रतियोगिता सहित अन्य गतिविधियाँ आयोजित की जाएंगी। पं. माधव राव सप्रे ने अहिन्दी भाषी होते हुए हिन्दी को राष्ट्रभाषा के रूप में अपनाया। जब अंग्रेजी हुकूमत भारत को अनेक रियासतों, धर्मों, जातियों में बँटा मानकर एक राष्ट्र मानने से इन्कार कर रही थी तब अपने तथ्यों और तर्कों के बल पर उन्होंने “भारत एक राष्ट्रीयता का शंखनाद” किया। यह आवश्यक है कि युवा पीढ़ी प्रदेश की माटी में जन्में ऐसे महान सपूतों से परिचित हो और उनसे प्रेरणा ले। आने वाली पीढ़ी को देश, भाषा और राष्ट्रीयता की भावना को समर्पित ऐसी विभूतियों से परिचित कराना राज्य सरकार का दायित्व है।

मुख्यमंत्री श्री चौहान माधव राव सप्रे सार्द्ध शती कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। निवास पर आयोजित इस कार्यक्रम में मुख्यमंत्री श्री चौहान ने माधव राव सप्रे सार्द्ध शती स्मारक ग्रंथ तथा पद्मश्री श्री विजयदत्त श्रीधर द्वारा लिखित “मिंटो हाल- मध्यप्रदेश की राजनीति की कहानी” पुस्तक का विमोचन भी किया। कार्यक्रम में हिन्दी भवन के मंत्री संचालक  कैलाशचंद्र पंत, तुलसी मानस प्रतिष्ठान के कार्यकारी अध्यक्ष श्री रघुनंदन शर्मा विशेष रूप से उपस्थित थे।

 

हिन्दी का तेज थे सप्रे जी

मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि  विजयदत्त श्रीधर द्वारा श्री माधवराव सप्रे की स्मृति में स्थापित समाचार-पत्र संग्रहालय से श्री सप्रे की बहुमुखी प्रतिभा, उनके योगदान और स्मृतियों को बनाए रखने में मदद मिली है। यह  विजयदत्त श्रीधर का अनूठा योगदान है। मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि श्री सप्रे हिन्दी नव जागरण के पुरोधा थे। उन्होंने नाम की कभी कामना नहीं की, वे चाहते तो अंग्रेजों की सरकारी नौकरी स्वीकार कर आराम का जीवन जी सकते थे। सप्रे जी ने पत्रकारिता को जन-जागरण का माध्यम मानकर अपनाया और हिन्दी पत्रकारिता तथा पत्रकारों को संस्कार दिए। पं. माखनलाल चतुर्वेदी ने पं. माधव राव सप्रे को हिन्दी का तेज निरुपित किया था।

सप्रे जी के पारस स्पर्श ने कई विभूतियों को प्रभावित किया

सप्रे संग्रहालय के संयोजक एवं वरिष्ठ पत्रकार  विजयदत्त श्रीधर ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी द्वारा आजादी के 75वें वर्ष के उत्सव के अंतर्गत भारतीय नव जागरण के अचर्चित महानायकों को रेखांकित करने की पहल प्रशंसनीय है। इनमें पं. माधव राव सप्रे सर्वोपरि है। सप्रे जी के पारस स्पर्श ने पं. माखनलाल चतुर्वेदी, सेठ गोविंददास जैसे व्यक्तियों को भी प्रभावित किया।

 

हिन्दी की पहली लघु कथा लेखन का श्रेय सप्रे जी को है

हिन्दी भवन के मंत्री संचालक  कैलाश चंद्र पंत ने कहा कि हिन्दी राष्ट्रीय स्वर को व्यक्त करने वाली वाणी है, इसे सप्रे जी ने केवल स्वीकारा ही नहीं अपितु इस भाव को विस्तारित करने के लिए हरसंभव प्रयास किया। उनके द्वारा दासबोध, तिलक के अमर ग्रंथ श्रीमद् भागवत गीता आदि के अनुवाद इस तथ्य के प्रमाण हैं। हिन्दी की पहली लघु कथा “टोकरी भर मिट्टी” के लेखन का श्रेय भी सप्रे जी को है।

तुलसी मानस प्रतिष्ठान के कार्यकारी अध्यक्ष  रघुनंदन शर्मा ने सप्रे जी की हिन्दी नव जागरण आंदोलन में कालजयी भूमिका का स्मरण करते हुए आभार माना। इस अवसर पर राज्य सूचना आयुक्त  विजय मोहन तिवारी, वरिष्ठ पत्रकार  राजेन्द्र शर्मा,  अभिलाष खांडेकर,  राजेश बादल,  राकेश अग्निहोत्री,  शिव कुमार अवस्थी,  वैभव श्रीधर, सप्रे संग्रहालय की डॉ. मंगला अनुजा,  चंद्रकांत नायडू और हिंदी भवन, मानस भवन आदि के पदाधिकारी उपस्थित थे।