विविकं के निजीकरण के प्रस्ताव के विरोध में प्रधानमंत्री के नाम कलेक्टर को सौंपा ज्ञापन

कर्मचारी संगठनों का महागठबंधन ने एक साथ दिया ज्ञापन
भिण्ड। मप्र विद्युत निजीकरण विरोधी संयुक्त मोर्चा मप्र विद्युत अधिकारी/ कर्मचारी संगठनों का महागठबंधन ने मंगलवार कलेक्ट्रेट कार्यालय पहुंचकर प्रधानमंत्री भारत शासन नई दिल्ली के नाम कलेक्टर वीरेन्द्रङ्क्षसह रावत को प्रदेश में विद्युत वितरण कंपनियों के निजीकरण के प्रस्ताव के विरोध में ज्ञापन आधा सैकड़ा से अधिक बिजली कंपनी के अधिकारी/कर्मचारी ज्ञापन देने पहुंचे। ज्ञापन में बताया गया कि मप्र की सभी विद्युत संगठनों द्वारा 1 अक्टूबर को बैठक कर केन्द्र सरकार द्वारा सभी प्रदेशों की विद्युत वितरण कंपनियों के निजीकरण करने हेतु स्टेडर्ड बिड डॉक्यूमेंट जारी कर सभी वितरण कंपनियों के निजीकरण करने की योजना का विरोध करने हेतु मप्र विद्युत निजीकरण विरोधी संयुक्त मोर्चा का गठन किया गया है। संयुक्त मोर्चा मप्र के विद्युत क्षेत्र के सभी कर्मचारी/अधिकारी संगठनों द्वारा विद्युत वितरण कंपनियों के निजीकरण का निर्णय किसी भी प्रकार से देश के विद्युत क्षेत्र के एवं उपभोक्ताओं में समग्र हित में नहीं है एवं संयुक्त मोर्चा द्वारा इस प्रस्ताव का सख्त विरोध करने का निर्णय लिया गया है। यह भी निर्णय लिया गया है कि यदि मप्र में वितरण कंपनियों के निजीकरण करने का निर्णय लिया जाता है कि तो संपूर्ण मप्र में संयुक्त मोर्चा के तत्वाधान में शांतिपूर्ण आंदोलन गतिविधियां शुरु कर कायर्क वहिष्कार जैसे कठोर निर्णय भी लिये जा सकते हैं। इसलिए केन्द्रीय विद्युत मंत्रालय द्वारा वितरण कंपनियों के निजीकरण हेतु जारी स्टैण्डर्ड बिड डॉक्यूमेंट को निरस्त करते हुए वितरण कंपनियों के निजीकरण में रोक लगाने हेतु संबंधितों को निर्देशित करने का कष्ट करें। ज्ञापन देने वालों में ईव्हीके एस परिहार महासचिव मप्रविम अभियंता संघ, ई. कुलदीप सिंह अध्यक्ष मप्रपाइंइंए, इं.जीके बैष्णव महासिचव मप्र पत्रों अभियंता संघ, सुनील कुरेले, अर्जुन यादव, हरेन्द्र श्रीवास्तव, शिव राजपूत, सुशील शर्मा, अरुण ठाकुर, मनोज गुप्ता, सतीश श्रीवास्तव, मुकेश वर्मा, केशवलाल गुप्ता, आरसी माली, दिनेश दुबे आदि कर्मचारी मौजूद रहे।