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बाघिन के आश्रयस्थल बने कालदां के बियाबान जंगल

बून्दी.KrishnakantRathore/ @www.rubarunews.com-बूंदी जिले में रामगढ़ विषधारी टाइगर रिजर्व के बफर जोन में कालदां के जंगल जैवविविधता के लिहाज से काफी समृद्ध व लोगों की पहुंच से दूर है। इस बियावान एवं सदाबहार जंगल को युवा बाघिन आरवीटी 8 ने अपना नया ठिकाना बना लिया है। बाघिन ने 5 माह से निरंतर इस क्षेत्र में विचरण कर रही है। इस क्षेत्र में देवझर महादेव से भीमलत महादेव तक के जंगल में दो दर्जन से अधिक प्राकृतिक जलस्रोत व पहाड़ी दर्रे हैं। इस क्षेत्र में सदियों से बाघों सहित सभी वन्यजीवों की भी उपस्थिति बनी हुई है। बाघिन के इस इलाके में आने से जंगल में लोगों की आवाजाही बंद कर चौकसी बढ़ा दी है। वन विभाग ने कालदां माताजी, देवझर महादेव, दुर्वासा ऋषि महादेव, सिंधिकेश्वर नारायणपुर, पारा का नाला आदि स्थानों पर श्रद्धालुओं के पैदल जाने पर प्रतिबंध लगा दिया है। इसके साथ ही बाघिन की नियमित मोनिटरिंग के लिए टीमें गठित कर 24 घण्टे ट्रेकिंग की जा रही है।
कालदां बफर जोन में वन विभाग की सुस्ती पड़ेगी बाघों पर भारी
 टाइगर रिजर्व के कोर प्रथम से जुड़े बूंदी शहर से भीमलत तक के महत्वपूर्ण जंगल को टेरिटोरियल के अधीन रखने से यहां की जैवविविधता को बाघों के अनुकूल बनाने के लिए अभी तक कोई ठोस शुरुआत नहीं हुई है जिससे यहां की जैवविविधता कुप्रबंधन की भेंट चढ़ने लगी है। टाइगर रिजर्व बनने के बाद इस क्षेत्र में भी विकास की उम्मीद थी लेकिन टाइगर रिजर्व प्रबंधन ने अभी तक इस जंगल को विकसित करने के लिए कोई प्रभावी कार्ययोजना तैयार नहीं की है। यहां पर अवैध रूप से लोगों की आवाजाही जारी है तथा बाघों के लिए किसी प्रकार की तैयारी अभी तक वन विभाग ने नहीं की है। रामगढ़ विषधारी टाइगर रिजर्व के कोर 1 में अभी 8 बाघ बाघिन हो चुके है और दो बाघिन दूसरे राज्यों से ओर लाने की तैयारी है। वन महकमा केवल कोर 1 को ही बाघों की शरणस्थली मान कर काम करने में जुटा है। कॉरिडोर को विकसित करने या बफर जोन को बाघों के अनुकूल बनाने में वन विभाग गंभीर नहीं है जिसका खामियाजा आने वाले समय में बूंदी की जनता व यहां के वन्यजीवों को उठाना पड़ेगा। वन्यजीव प्रेमी लंबे समय से कोर के साथ बफर को भी विकसित करने की मांग कर रहे हैं लेकिन वन विभाग ने इस मामले में रुचि नहीं दिखाई है।
बाघों का गलियारा विकसित हो तो हाड़ौती से मेवाड़-मालवा तक बढ़े बाघों का सहज आवागमन
रणथंभौर टाइगर रिजर्व में बाघों का कुनबा बढ़ने के साथ ही बाघों को मजबूरी में अन्य टाइगर रिजर्व में शिफ्टिंग करने के प्रयास वन विभाग कर रहा है और इसकी शुरुआत भी हो चुकी है लेकिन यह स्थाई समाधान के रूप में नहीं देखा जा रहा है। वन्यजीव और बाघ एक्सपर्ट मानते हैं कि रामगढ़ जो बाघों का सदियों से कॉरिडोर रहा है उसे फिर से बहाल करने की आवश्यकता है। बूंदी में कालदां के जंगल उस कॉरिडोर का महत्वपूर्ण हिस्सा है जिसे नजर अंदाज किया जा रहा है। कालदां क्षेत्र में ट्रेकिंग रूट नहीं होने से बाघिन आरवीटी 8 की मोनिटरिंग में जुटे वनकर्मियों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। क्षेत्र में जुलिफ्लोरा उन्मूलन व नए ग्रासलैंड बनाने के काम भी शुरु नहीं हो पाए हैं। गौरतलब है कि टाइगर रिजर्व के लिए सारा बजट कोर डीएफओ के पास आता है और कालदां बफर जोन टेरिटोरियल डीएफओ के पास होने से इसे बाघों के अनुकूल बनाने के काम शुरु नहीं हो पा रहे हैं।