बूंदी में कजली तीज: सांस्कृतिक उत्सव के साथ ‘बाल विवाह मुक्त राजस्थान’ का संदेश
बूंदी.KrishnakantRathore/ @www.rubarunews.com- बूंदी में आयोजित प्रसिद्ध कजली तीज मेले में इस साल न केवल पारंपरिक उल्लास और सांस्कृतिक भव्यता देखने को मिली, बल्कि एक महत्वपूर्ण सामाजिक संदेश भी गूंजा। मेले के दौरान ‘बाल विवाह मुक्त राजस्थान’ थीम पर आधारित एक बाल विवाह नाटक का सफल आयोजन किया गया, जिसने दर्शकों को गहरे तक प्रभावित किया। इस पहल को बाल कल्याण समिति, बाल अधिकारिता विभाग और चाइल्ड हेल्पलाइन 1098 के सहयोग से अंजाम दिया गया, जो समाज में इस गंभीर कुरीति के प्रति जागरूकता फैलाने का एक प्रभावी प्रयास साबित हुआ।
टैगोर बालघर के बच्चों द्वारा प्रस्तुत इस नाटक ने लोगों का ध्यान खींचा। बाल कलाकारों ने अपने सशक्त अभिनय और मार्मिक संदेशों के जरिए यह दिखाया कि कैसे बाल विवाह बच्चों के अधिकारों का हनन करता है। नाटक में कम उम्र में शादी के शारीरिक, मानसिक और शैक्षिक दुष्परिणामों पर प्रकाश डाला गया, जैसे कि कम उम्र में गर्भधारण, मातृ और नवजात मृत्यु दर, शिक्षा में बाधा, और आजीविका के अवसरों की कमी।
नाटक के माध्यम से दर्शकों को यह भी समझाया गया कि बाल विवाह बच्चों को हिंसा, शोषण और यौन शोषण जैसे खतरों में डालता है। नाटक का उद्देश्य समाज को एकजुट होकर इस प्रथा को समाप्त करने और सामाजिक परिवर्तन की दिशा में कदम बढ़ाने के लिए प्रेरित करना था।
बाल कल्याण समिति की अध्यक्ष सीमा पोद्दार ने इस प्रयास की सराहना करते हुए कहा कि यह नाटक न केवल बच्चों की प्रतिभा को उजागर करता है, बल्कि जागरूकता फैलाने का एक शक्तिशाली माध्यम भी है। उन्होंने इस तरह के आयोजनों को समाज में सकारात्मक बदलाव लाने और युवा पीढ़ी को सशक्त बनाने के लिए महत्वपूर्ण बताया।
मेले में मौजूद स्थानीय लोगों और अधिकारियों ने इस अनूठी पहल की सराहना की और इसे अन्य क्षेत्रों में भी लागू करने की आवश्यकता पर जोर दिया। नाटक के बाद, सभी उपस्थित लोगों को बाल विवाह न करने की शपथ भी दिलाई गई।
चाइल्ड हेल्पलाइन 1098 और बाल अधिकारिता विभाग की ओर से दुकानदारों और आगंतुकों से 1,000 से अधिक संकल्प पत्र भरवाए गए, जिसमें उन्होंने बाल विवाह न करने और न करवाने का संकल्प लिया। बूंदी जिले में बाल विवाह रोकने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। अब तक 135 बाल विवाहों की रिपोर्ट हुई है, जिनमें से 119 को कोर्ट में निषेधाज्ञा जारी करवाकर रोका गया है। इसके अतिरिक्त, 15 अगस्त को भी जिले भर के 1 लाख से अधिक बच्चों और ग्रामीणों ने बाल विवाह नहीं करने की शपथ ली थी, जो इस दिशा में हो रहे व्यापक प्रयासों को दर्शाता है।
इस अवसर पर बाल अधिकारिता विभाग से सरफराज आलम, गोविंद कुमार, बादल कुमार, रामभवन, चाइल्ड हेल्पलाइन 1098 से रामनारायण, मंजीत, रवि, बुद्धिप्रकाश और टैगोर बालघर से विजयवाला, सुरेंद्र, गुंजन, आशाराम जैसे कई अधिकारी और कार्यकर्ता मौजूद रहे।