आरटीआई और ग्रामीण विकास विषय पर 21वें वेबीनार का हुआ आयोजन

रीवा/ दतिया @rubarunews.com>>>>>>>   RTI और ग्रामीण विकास विषय पर आयोजित हुआ 21वां राष्ट्रीय वेबीनार// सूचना आयूक्त राहुल सिंह की अध्यक्षता में हुआ आयोजन// पूर्व केंद्रीय सूचना आयुक्त शैलेश गांधी, पूर्व एसआईसी आत्मदीप, एक्टिविस्ट भास्कर प्रभु एवं विजय वर्मा रहे विशिष्ट अतिथि// सभी ने साझा किए अपने अनुभव, कहा RTI के लिए जनता को जागरूक होना पड़ेगा*

पूरे देश में सूचना के अधिकार कानून पर आयोजित होने वाले राष्ट्रीय जूम मीटिंग वेबीनार की धूम मची हुई है। बता दें कि हर रविवार सुबह 11:00 बजे से दोपहर लगभग 2:00 बजे तक आयोजित होने वाले जूम मीटिंग वेबीनार में देश के कोने-कोने से आरटीआई कार्यकर्ता, सामाजिक क्षेत्र में कार्यरत व्यक्ति, प्रोफेशनल बैकग्राउंड के व्यक्ति, रिटायर्ड नौकरशाह, वर्तमान पदाधिकारी, भूतपूर्व सूचना आयुक्त, समाज के अन्य कई वर्ग के वरिष्ठ लोग सभी जुड़ते हैं और अपनी अपनी बातें रखते हैं तथा समस्याओं का हल पाते हैं। कार्यक्रम में न्यायिक क्षेत्र के व्यक्ति, रिटायर्ड जज और वर्तमान कई अधिवक्तागण भी सम्मिलित रहते हैं जो कार्यक्रम को और भी रुचिकर बना देता है।

 

आरटीआई और ग्रामीण विकास विषय पर 21वें वेबीनार का हुआ आयोजन

इस बीच दिनांक 15 नवंबर 2020 को सुबह 11:00 बजे से दोपहर 2:00 बजे तक लगभग 3 घंटे 21 वें वेबीनार का आयोजन किया गया जिसमें देश के विभिन्न कोनों से कार्यकर्तागण सम्मिलित हुए। इस कार्यक्रम का विषय आरटीआई और ग्रामीण विकास रखा गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता मध्य प्रदेश के वर्तमान राज्य सूचना आयुक्त राहुल सिंह ने किया जबकि विशिष्ट अतिथि के रूप में पूर्व केंद्रीय सूचना आयुक्त शैलेश गांधी, मध्य प्रदेश के पूर्व सूचना आयुक्त आत्मदीप, माहिती अधिकार मंच मुंबई के संयोजक भास्कर प्रभु एवं जागो इंडिया के निदेशक विजय वर्मा सम्मिलित हुए।

कार्यक्रम का संयोजन प्रबंधन एवं समन्वयन का कार्य एक्टिविस्ट शिवानन्द द्विवेदी, अधिवक्ता नित्यानंद मिश्रा शिवेंद्र, मिश्रा, अंबुज पांडे एवं वरिष्ठ पत्रकार मृगेंद्र सिंह के द्वारा किया गया।

ग्रामीण विकास की करोड़ों की राशि किस प्रकार से उपयोग हो रही जनता को जानने का पूरा अधिकार – सूचना आयुक्त राहुल सिंह

इस बीच कार्यक्रम की शुरुआत करते हुए कार्यक्रम के अध्यक्ष वर्तमान मध्य प्रदेश राज्य सूचना आयुक्त राहुल सिंह ने कहा कि सरकार के द्वारा केंद्रीय स्तर एवं राज्य स्तर दोनों से करोड़ों की राशि का आवंटन विभिन्न मदो के द्वारा ग्राम पंचायतों के विकास के लिए किया जाता है। जिनमें मनरेगा योजना, पंच परमेश्वर, वित्त आयोग एवं अन्य कई निधियां शामिल रहती है। न केवल इन योजनाओं के माध्यम से बल्कि अन्य कई विभागों के माध्यम से भी काफी राशि पंचायत क्षेत्र के अंतर्गत कार्य करने वाले अन्य विभागों के माध्यम से विकास के लिए जारी की जाती है परंतु इन सभी राशि का किस प्रकार से उपयोग किया जाता है यह सभी प्रश्न के दायरे में बना रहता है। इस विषय में समय-समय पर आरटीआई कानून की धारा 4 के तहत मनरेगा, पंचायत दर्पण, ग्राम स्वराज एप्लीकेशन आदि के माध्यम से जानकारी भी साझा की जाती है जिससे आम व्यक्ति को अब काफी हद तक जानकारी मिलने लगी है। एप के माध्यम से भी जानकारी मोबाइल पर एक क्लिक में देखी जा सकती है परंतु अभी बहुत जानकारियां ऐसी होती हैं जो कि या की अपडेट नहीं होती है या कि अभी भी साझा नहीं की जा रही है जिसकी वजह से ग्रामीण क्षेत्रों के विकास की जानकारी और पारदर्शिता में काफी समस्या बनी हुई है।

इसके लिए आरटीआई कार्यकर्ताओं और जागरूक प्राणियों को सतत कार्य करने की आवश्यकता है और जन जागरण से ही पारदर्शिता संभव हो पाती है। इसलिए पारदर्शी समाज बनाने के लिए सभी को मिलकर कार्य करने की आवश्यकता है।


सूचना आयोग की नाकामी की वजह से आवेदक हो रहे परेशान- शैलेश गांधी

इस बीच अपनी बात रखते हुए कुछ प्रश्नों के जवाब में पूर्व केंद्रीय सूचना आयुक्त शैलेश गांधी ने बताया कि सूचना आयोग को टाइम बाउंड मैनर के तौर पर अधिकतम 45 दिन के भीतर दूसरी अपील का निराकरण कर देना चाहिए। उन्होंने एक बार पुनः कर्नाटक एवं कोलकाता हाई कोर्ट के फैसले का हवाला देते हुए कहा की सूचना आयोग को 45 दिन में ही निर्णय देना होता है। इस विषय में सभी एक्टिविस्ट को मिलकर काम करने की आवश्यकता है और अपने सूचना आयोग को लीगल नोटिस जारी करें। इसके बाद मामले को पीआईएल लगाकर कोर्ट में ले जाएं तभी कुछ होगा वरना इसी प्रकार चलता रहेगा और हम बस एक दूसरे से बात करते रह जाएंगे कि यह नहीं हो रहा है वह नहीं हो रहा है।

उत्तर प्रदेश सूचना आयोग में पीआईओ के फेवर में वकील जाते हैं क्योंकि सूचना आयोग नाकाम रहा है -शैलेश गांधी

इस बीच जागो इंडिया फाउंडेशन के निदेशक विजय वर्मा ने उत्तर प्रदेश सूचना आयोग का उदाहरण देते हुए बताया की यूपी में जब आयोग के समक्ष पेशियां निर्धारित होती हैं तो लोक सूचना अधिकारी और प्रथम अपीलीय अधिकारी अपनी तरफ से वकील भेज देते हैं। और 30 से 40 पेशियां करवाई जा रही है। जिससे आवेदक पूरी तरह से परेशान हो चुका है। इस पर पूर्व केंद्रीय सूचना आयुक्त ने कहा सवाल इसका नहीं है कि वकील पेशी पर जा रहे हैं बल्कि सवाल यह है कि उत्तर प्रदेश का सूचना आयोग पूरी तरह से नाकाम रहा है। अपनी नाकामी की वजह से सूचना आयोग कोई कार्यवाही नहीं कर रहा है जिसकी वजह से ऐसी दुर्भाग्यपूर्ण स्थिति निर्मित हुई है।

रूरल डेवलपमेंट पर हम क्लासेस चलाकर कार्य कर रहे हैं- विजय वर्मा

इस बीच उत्तर प्रदेश के रामपुर से जागो इंडिया फाउंडेशन के निदेशक विजय वर्मा ने 21वें वेबीनार में अपना अनुभव साझा करते हुए बताया कि उन्होंने कई क्षेत्र में कार्य किए हुए हैं और काफी अनुभव हासिल किए हुए हैं। पूरे देश में आरटीआई आवेदन लगाने वाले एक्सपर्ट लोगों को तैयार कर रहे हैं जिसके लिए ट्रेनिंग का कार्यक्रम भी चलाते रहते हैं। उन्होंने बताया कि ग्रामीण क्षेत्रों में विशेष तौर पर ऐसे ट्रेनिंग के कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं और प्रयास किए जा रहे हैं कि हर व्यक्ति को आरटीआई लगाना आने लगे। अमूमन ऐसा होता है कि कोई व्यक्ति आरटीआई स्वयं न लिखकर अन्य किसी एक्सपर्ट से लिखवा लेता है लेकिन वह सही नहीं है हम यह चाहते हैं कि हर व्यक्ति आरटीआई लगाना सीख जाए इसीलिए ट्रेनिंग देते रहते हैं।

खाद्य विभाग के निर्णय, सहकारिता और जीएडी की वेबपोर्टल में उपलब्ध है- आत्मदीप

इस बीच पूर्व मध्य प्रदेश राज्य सूचना आयुक्त आत्मदीप ने बताया कि पीडीएस कंट्रोल सदैव ही एक महत्वपूर्ण विभाग के तौर पर रहा है क्योंकि गरीबों के खाद्यान्न वितरण की जिम्मेदारी फूड विभाग के पास होती है। फूड विभाग को आरटीआई के दायरे में लाने के लिए समितियों में आरटीआई लगाया जा सकता है इस विषय में सर्कुलर संबंधित सहकारिता विभाग के वेब पोर्टल में भी मिल जाएंगे और साथ में सामान्य प्रशासन के वेब पोर्टल में भी उपलब्ध रहते हैं।

खाद्यान्न वितरण आवंटन में पारदर्शिता होना आवश्यक है और इसके लिए समय-समय पर सरकारी निर्देश भी जारी होते रहते हैं। लेकिन यह आवश्यक है कि आरटीआई कार्यकर्ता और आवेदक समय-समय पर इसका विश्लेषण करते रहे और जहां भी कमियां रहे आरटीआई लगाकर मामले उठाते रहे।

वेबीनार में पूरे देश प्रदेश से सम्मिलित हुए सैकड़ों आरटीआई कार्यकर्ता

इस बीच 21वें ज़ूम मीटिंग वेबीनार के दौरान पूरे देश के विभिन्न राज्यों – मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, झारखंड, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, दिल्ली, बिहार, जम्मू कश्मीर, गुजरात, कर्नाटक, उड़ीसा, पश्चिम बंगाल, पंजाब, हरियाणा आदि राज्यों से सैकड़ों आरटीआई कार्यकर्ता, सामाजिक कार्यकर्ता, अधिवक्ता, वरिष्ठ नागरिक, रिटायर्ड अफसर, सूचना आयुक्त , पत्रकार आदि सम्मिलित हुए और सभी ने अपनी अपनी बातें रखी और अनुभव साझा की। सभी ने एक स्वर में कहा कि आरटीआई कानून को मजबूत बनाने के लिए यह आवश्यक है कि सब लोग मिलजुल कर काम करें और सामाजिक हितों के मुद्दों को उठाते रहे। धारा 4 के तहत ज्यादा से ज्यादा जानकारी सूचना आयोग को साझा करवाए जाने में जोर देना चाहिए और साथ में कार्यकर्तागण सरकार पर भी पत्राचार एवं अन्य माध्यमों से दबाव बनाकर ज्यादा से ज्यादा जानकारी वेब पोर्टल पर साझा हो इसके लिए दबाव बनाएं।