अमेरिकन सोसायटी की मदद से पूर्व मैं लेसिक ऑपरेशन किए युवा का सफल, लेंस प्रत्यारोपण 1 घंटे में लोटी रोशनी.

बूंदी.KrishnaKantRathore/ @www.rubarunews.com- बूंदी में अब विश्व स्तरीय नेत्र चिकित्सा सुविधा का लाभ यहां के निवासियों को मिलने लग गया है ।उच्च गुणवत्ता युक्त नेत्र चिकित्सा के लिए रोगियों को दिल्ली या जयपुर जैसे बड़े-बड़े शहरों में जाने की जरूरत नहीं है।

खोजा गेट रोड बूंदी , स्थित अग्रवाल आई एंड स्किन हॉस्पिटल में डॉक्टर संजय गुप्ता ने एक ऐसे ही युवा हरि ओम 29 वर्ष, की आंख के जटिल मोतियाबिंद का ऑपरेशन कर लेंस प्रत्यारोपण किया। जिसकी आंख की पुतली का पूर्व में लेसिक लेजर पद्धति से चश्मा हटाने का ऑपरेशन होने से उसकी आंख की पुतली कोर्निया का आकार स्वरूप बिगड़ा हुआ था ।

डॉक्टर संजय गुप्ता ने बताया कि आज के 10 वर्ष पूर्व हरिओम की आंख में माइनस 6 नंबर का चश्मा हटाने का लेसिक लेजर ऑपरेशन दिल्ली में हुआ था । जिसके कारण आंखों की कोर्निया का आकार अपने मूल स्वरूप में नहीं रहा आकार बिगड़ने के बाद विगत 1 वर्ष से हरिओम की आंख में मोतियाबिंद रोग हो गया । जिससे उसकी रोशनी बहुत कम हो गई विकार युक्त कॉर्निया वाली आंखों में लेंस प्रत्यारोपण में लेंस की पावर की गणना सटीक नहीं होती , वह त्रुटि की संभावना बहुत ज्यादा रहती है इसीलिए बूंदी के सभी चिकित्सकों ने जयपुर या दिल्ली जाकर ऑपरेशन करवाने की सलाह दी ।

लेकिन अग्रवाल आई एंड स्किन हॉस्पिटल में डॉक्टर संजय गुप्ता ने लेंस की पावर की सटीक गणना करने के लिए मरीज के सभी डाटा निकालकर अमेरिकन सोसायटी फॉर कैटरेक्ट सर्जन ASCRS की वेबसाइट पर अपलोड किए। इस सोसाइटी ने ऐसे जटिल लेसिक युक्त कॉर्निया केसेज में लेंस की सटीक गणना हेतु फार्मूला ईजाद कर रखा है । जो बहुत अच्छे व सटीक परिणाम देता है , अमेरिकन सोसायटी ने प्रतिउत्तर में प्लस 14 की जगह प्लस 18 नंबर का लेंस प्रत्यारोपण करने की सलाह दी जिसके आधार पर हरिओम का टोपीकल फेको पद्धति से बिना इंजेक्शन बिना टांके व बिना पट्टी के जटिल मोतियाबिंद ऑपरेशन कर प्लस 18 नंबर का हाइड्रोफोबिक लेंस लगाया गया । कोर्निया की पारदर्शिता बनाए रखने हेतु विस्कोट दवा इस्तेमाल की गई वह मात्र 1 घंटे बाद रोगी को सब कुछ दिखाई देने लग गया । अमेरिकन सोसाइटी का त्वरित रेस्पॉन्स इस गणना में बहुत काम आया ।