यूरोपीय छाया से मुक्त करती है नई शिक्षा नीति

भोपाल.Desk/ @www.rubarunews.com>> वर्तमान शिक्षा नीति औपनिवेशिक काल की देन है। उस समय इसके उद्देश्य बहुत सीमित थे। आजादी के बाद शिक्षा नीति में कुछ बदलाव जरूर हुए, लेकिन इन पर भी मैकाले की छाया साफ दिखाई देती थी। लेकिन नई शिक्षा नीति राष्ट्र की आकांक्षा को पूरी करने वाली है, यह हममें आत्म गौरव का भाव जगाती है। यदि हम यह कहें कि नई शिक्षा नीति यूरोप की छाया से पूर्णतः मुक्त है तो इसमें कतई अतिश्योक्ति नहीं है। इस आशय के विचार आज मिन्टो हॉल में मध्यप्रदेश प्रेस क्लब द्वारा नई शिक्षा नीति पर आधारित विचार सत्र ‘शिक्षा चौपाल’ के आयोजन के दौरान माध्यमिक शिक्षा मण्डल के अध्यक्ष  राधेश्याम जुलानिया ने व्यक्त किए।

अपने उद्बोधन में श्री जुलानिया ने आंकड़ों की मदद से वर्तमान शिक्षा की जमीनी हकीकत से परिचित कराया, उन्होंने शिक्षा की स्थिति एवं संसाधनों पर प्रकाश डालते हुये कहा कि यह आलोचना की नहीं, बल्कि आत्मावलोकन की बात है। श्री जुलानिया ने कहा कि नई शिक्षा नीति परीक्षाओं की बाध्यता तथा पाठ्य सामग्री के चयन आदि में काफी रियायतें देती हैं जिससे शिक्षा में सुधार के रास्ते खुलते हैं।

मुख्य वक्ता राष्ट्रीय पुस्तक न्यास के अध्यक्ष एवं वरिष्ठ शिक्षाविद डॉ. गोविन्द शर्मा ने कहा कि नई शिक्षा नीति हममें राष्ट्रवाद का भाव जगाती है। यह राष्ट्रीय आकांक्षा को पूरा करने वाली है। आजादी के बाद बनी शिक्षा नीति में यूरोपीय दृष्टि थी। समय-समय पर इसमें बदलाव जरूर हुये लेकिन यह मात्र पेचवर्क ही कहे जायेंगे। इस शिक्षा नीति में भारतीय दृष्टि है, जो हमारी पारम्परिक चेतना को विकसित करती है।

कार्यक्रम के विशेष अतिथि  अशोक ग्वाल ने कहा कि यहाँ इस तरह स्कूली शिक्षा पर बात हो रही है उसी तरह उच्च शिक्षा की स्थिति पर भी बातें होना चाहिए। वहीं डॉ. भुवनेश शर्मा का कहना था कि शिक्षा बाहरी ज्ञान नहीं बल्कि भीतरी ज्ञान देने वाली होना चाहिए। नई शिक्षा नीति में भारत के पारम्परिक ज्ञान का समावेश है जो इस कमी को पूरी कर सकेगा। कौटिल्य अकादमी के डॉ. मनमोहन जोशी का कहना था कि नई शिक्षा नीति के मसौदे में कई बाते स्पष्ट नहीं होती इस पर भी चर्चा की जाना चाहिए ताकि शिक्षा नीति का ड्राफ्ट और पुष्ट हो सके। वरिष्ठ पत्रकार राकेश दुबे ने शिक्षा नीति के क्रियान्वयन में आने वाली जमीनी वास्तविकताओं की तरफ ध्यान खीचा। आरंभ में प्रेस क्लब के अध्यक्ष डॉ. नवीन आनंद जोशी ने स्वागत वक्तव्य देते हुए कहा कि नई शिक्षा नीति के लागू करने की तैयारियों तथा चुनौतियों को सामने लाना तथा इस पर एक वैचारिक वातावरण तैयार करना इस कार्यक्रम का उद्देश्य है। उन्होंने कहा कि इसके पूर्व में प्रेस क्लब द्वारा कोरोना को लेकर भी प्रदेश भर में आयोजन किये गये थे, जिसके अच्छे परिणाम सामने आये हैं। इसके पूर्व प्रधानमंत्री द्वारा लखनऊ विश्वविद्यालय में नई शिक्षा नीति पर दिये वक्तव्य को शार्ट फिल्म के माध्यम से प्रस्तुत किया गया। ‘शिक्षा चौपाल’ में नई शिक्षा नीति पर मंथन के लिए तीन विविध सत्र भी आयोजित किए गए। इन सत्रों का संचालन क्रमश : मध्यप्रदेश प्रेस क्लब के वरिष्ठ सहयोगी राकेश दुबे, संयुक्त सचिव अजय सिंह और संभागीय संयोजक दीपक गौतम ने किया। कार्यक्रम का संचालन  अजय प्रताप सिंह ने किया। इस अवसर पर  नितिन वर्मा,  जसविन्दर सिंह,  मृगेन्द्र शर्मा, शहर के शिक्षाविद तथा पत्रकारिता जगत से जुड़े लोग मौजूद थे।