बाल साहित्य का उद्देश्य मनोरंजन के साथ चरित्र निर्माण हो -महेश सक्सेना

भोपाल.Desk/ @www.rubarunews.com-बाल साहित्य का उद्देश्य सिर्फ मनोरंजन नहीं बल्कि बच्चों का चरित्र निर्माण करना भी है ,बच्चों को कहानियाँ सदैव से लुभाती रही हैं बच्चों की कहानियों में प्रकृति प्रेम पर्यावरण पशु-पक्षी उन्हें अपनी ओर आकर्षित करते हैं यह उदगार हैं वरिष्ठ बाल साहित्यकार और निदेशक बाल कल्याण साहित्य शोध संस्थान के निदेशक महेश सक्सेना के वे लघुकथा शोध केंद्र भोपाल और अपना प्रकाशन द्वारा आयोजित पुस्तक पखवाड़े के अंतर्गत सुपरिचित रचनाकार डॉ रंजना शर्मा की सद्य प्रकाशित बाल कहानी संग्रह ‘नानी की कहानियां ‘ पर केंद्रित विमर्श में कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए बोल रहे थे | कार्यक्रम के प्रारम्भ में घनश्याम मैथिल ‘अमृत’ ने स्वागत वक्तव्य दिया |इस अवसर पर कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में बोलते हुए डॉ मालती वसन्त ने कहा कि -‘ प्रस्तुत कहानी संग्रह ने प्राचीनता को नवीनता से जोड़ा है सभी कहानियां यथार्थ के धरातल से जुड़ी हैं जो उनमें सामाजिक चेतना का भाव जगाएँगी |आयोजन में विशिष्ट अतिथि और वक्ता के रूप में बोलते हुए वरिष्ठ बाल साहित्यकार राजकुमार जैन ‘राजन’ अकोला (राजस्थान) ने कहा कि -‘ नानी की कहानियां बाल कथा सँग्रह बच्चों को जीवन जीने की दिशा देता है यह कहानियां बच्चों के साथ ही बड़ों को भी रोचक लगेगी,आज के बच्चे सायबर युग के बच्चे हैं उन्हें संस्कारवान सुयोग्य नागरिक बनाने के लिए पुस्तक सँस्कृति से जोड़ना होगा इसके लिए बच्चों के अभिभावकों के साथ ही उनके शिक्षकों की भूमिका भी महत्वपूर्ण है |’ चर्चा में भाग लेते विशिष्ठ वक्ता हुए वरिष्ठ साहित्यकार डॉ शील कौशिक सिरसा (हरियाणा) ने कहा कि-‘आज के बच्चों को सहज ही बहलाया फुसलाया नहीं सकते वे प्रश्न पूछते हैं उनकी जिज्ञासा का तर्क सम्मत समाधान किया जाना आवश्यक है ,प्रस्तुत सँग्रह की कहानियां बच्चों में न सिर्फ उत्सुकता जगाती हैं बल्कि उन्हें इन कहानियों से प्रेरणा भी मिलती है |’ आयोजन में अपनी बात रखते हुए वरिष्ठ बाल साहित्यकार ओम प्रकाश क्षत्रिय (नीमच) ने बाल साहित्य को रोचक सहज सरल और सन्देश प्रद होना आवश्यक बताया और प्रस्तुत सँग्रह को बालोपयोगी उत्तम बाल कहानी संग्रह निरूपित किया जो आकर्षक सुंदर मनोहारी चित्रों से सुसज्जित है | कार्यक्रम में लेखिका डॉ रंजना शर्मा ने इन कहानियों को अपने जीवन की अमूल्य धरोहर और पूंजी बताते हुए कहा कि यह कहानियां बच्चों में कौतूहल का भाव जगाने के साथ उनकी जिज्ञासाओं को भी शांत करेंगी ,और उन्होंने सभी मंचस्थ अतिथियों एवम उपस्थित साहित्यकारों का ह्रदय से आभार प्रकट किया | कार्यक्रम का सुमधुर सफल संचालन मधुलिका सक्सेना ने किया | इस आयोजन में मुकेश वर्मा , डॉ राजेश श्रीवास्तव ,विभा रश्मि, अंजू खरबंदा, अशोक धमेनिया, कर्नल डॉ गिरजेश सक्सेना, राधेश्याम भारतीय,आशीष दलाल, हरीश सेठी, सुनीता यादव, विमल शुक्ला, अमर बहादुर मांझी, मनोरमा पन्त, भारती पराशर, जया आर्य, विनोद कुमार जैन, शेख शहज़ाद उस्मानी,गिरिजा कुलश्रेष्ठ, शशि बंसल,शेफालिका सक्सेना,मृदुल त्यागी,जया शर्मा ,डॉ ऋचा ,सत्यजीत रॉय,डॉ मौसमी परिहार ,,अनिता झा, वीणा शर्मा,अंतरा करवड़े,डॉ वर्षा ढोबले ,उषा जायसवाल,प्रदीप स्वामी ,बिंद्रा , मुजफ्फर इकबाल सिद्दीकी, घनश्याम मैथिल’अमृत’ और कार्यक्रम की आयोजक लघुकथा शोध केंद्र भोपाल की निदेशक वरिष्ठ लघुकथाकार कांता रॉय सहित अनेक बाल साहित्य प्रेमी साहित्यकार उपस्थित थे |