बाल विवाहों के मामलों में भी इस बार सुरक्षित रही है बूंदी

बूंदी.KrishnaKantrathore/ @www.rubarunews.com>> बाल विवाहों के मामले में प्रदेश में अग्रणी रहने वाले बूंदी जिले में इस बार लाॅकडाउन के चलते बाल विवाहांे का कलंक नहीं लग पाया है। बाल विवाह रुकवाने की मशक्कत जैसी नौबत नहीं आई है, ना ही इस संबंध में शिकायतें दर्ज हो पाई हैं।
बूंदी जिले में आखा तीज, पीपल पूर्णिमा आदि अबूझ सावों पर बाल विवाह की बड़ी आशंका रहती है। प्रशासन की सख्त निगरानी और निषेधात्मक आदेशोें के बावजूद बहुत से लोग चोरी छिपे बाल विवाह की तैयारी कर लेने में सफल हो जाते हैं, और शिकायत होने पर प्रशासनिक अमले की दौड़ भाग के बाद विवाह रूकवाने की कार्यवाई होती है। बीत सालों इस तरह की घटनाएं आम बात रही हैं। इस बार भी जिला प्रशासन द्वारा बाल विवाह के संबंध में निषेधात्मक आदेश जारी कर आवश्यक व्यवस्थाएं की गई।
गत वर्ष बाल विवाहों से संबंधित 28 शिकायती प्रकरण जिले में दर्ज हुए जिन पर कार्यवाई की गई। संबंधित लोगों को बाल विवाह नहीं करने के लिए पाबंद किया गया। इस बार अबूझ सावा निकलने पर भी ऐसी स्थिति नहीं आ पाई। लाॅकडाउन के दौरान में प्रशासन की सख्ती और विवाहो की अनुमति की अनिवार्यता के चलते बाल विवाह जैसी कुरीति पर लगाम लगी है।
सहायक निदेशक महिला अधिकारिता विभाग भैरू प्रकाश नागर ने बताया कि बूंदी जिले का बाल विवाह के मामले में राजस्थान में 8वां स्थान है। साथिन, आंगनबाड़ी कार्यकर्ता, सहयोगिन आदि के प्रयासो से समाज में काफी जागरूकता आई है और लोग इस कुरीति के दुष्परिणाम समझने लगे हैं फिर भी हर साल चोरी छिपे बाल विवाह होने से इनकार नहीं किया जा सकता। इस बार अब तक एक मात्र शिकायत प्राप्त हुई जो कोटा से संबंधित होने के कारण पाबंध करने की कार्यवाई कोटा से की गई। इसके अलावा कोई शिकायत दर्ज नही हुई है।

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