जटिल एवं कष्टसाध्य रोगों में वरदान सिद्ध हो रही पंचकर्म चिकित्सा प्रणाली

बूंदी.KrishnaKantRathore/ @www.rubarunews.com-अनादि काल से ही चली आ रही आयुर्वेदिक चिकित्सा जो कि भारत की प्राचीन चिकित्सा प्रणाली में से एक है। इतनी प्राचीन चिकित्सा प्रणाली होने के बावजूद भी आयुर्वेदिक चिकित्सा प्रणाली भारत में मृतप्राय सी हो कर रह गई थी तथा आम लोग भी इस पर किसी प्रकार की रुचि नहीं दिखाते थे। लेकिन यह कोरोना काल आयुर्वेदिक चिकित्सा प्रणाली के लिए संजीवनी बनकर आया है। लोग अब एलोपैथिक चिकित्सा से हटकर आयुर्वेदिक चिकित्सा पर अधिक विश्वास कर रहे हैं। इसका सबसे बड़ा कारण पंचकर्म चिकित्सा है। आयुर्वेदिक पंचकर्म चिकित्सा प्रणाली पुराने से पुराने जटिल असाध्य रोगों से लोगों को निजात दिलाने में कारगर सिद्ध हुई है।
बूंदी जिला आयुर्वेदिक अस्पताल जिला रोगी कल्याण समिति के माध्यम से पीपीपी मोड पर जारी पंचकर्म चिकित्सा प्रणाली पूरे राजस्थान में मिसाल के रूप में एक रोल मॉडल बनकर सामने आया है। प्रमुख शासन सचिव आयुर्वेदिक निदेशक ने अब इसे सभी जिलों में लागू करने के निर्देश दिया है तथा इसकी जिम्मेदारी अतिरिक्त निदेशक कोटा संभाग को दी गई है।
जिला आयुर्वेदिक अस्पताल के प्रभारी वरिष्ठ आयुर्वेदिक चिकित्सक एवं पंचकर्म चिकित्सा विशेषज्ञ डॉक्टर सुनील कुशवाह ने बताया कि कोरोना संक्रमण से बचाव में आयुर्वेदिक चिकित्सा प्रणाली कारगर साबित हुई है। इसी का परिणाम है कि केंद्रीय आयुष मंत्रालय भारत सरकार ने मंगलवार 6 अक्टूबर को आयुर्वेद कोविड मैनेजमेंट प्राटोकोल जारी किया। केंद्रीय स्वास्थय मंत्री डॉ. हर्षवर्धन ने प्रोटोकोल का विमोचन किया। इस प्रोटोकाल को कोविड संक्रमण को रोकने, अल्प और मध्यम लक्षण वाले कोरोना संक्रमित रोगियों पर कई संस्थानों में आईसीएमआर, नीति आयोग और अन्य वैज्ञानिक संस्थानों के निर्देशन में हुये शोध अध्ययनों के आधार पर जारी किया गया है।
डॉक्टर कुशवाह ने बताया कि आयुर्वेदिक अस्पताल में रोगी कल्याण समिति के माध्यम से पीपीपी मोड पर पंचकर्म चिकित्सा प्रणाली शुरू की गई है। जिसमें अभी तक 4800 से ज्यादा रोगी चिकित्सा का लाभ ले चुके हैं। यहां कही पद्धतियों से पंचकर्म किया जा रहा है। 16 देशोंं के 107 विदेशी पर्यटक अब तक इस पंचकर्म क्रिया का लाभ उठा चुके हैं। जिला अस्पताल में वमन विरेचन, बस्ति, शिरोधारा, नस्य, कटि बस्ति, नाड़ी स्वेदन, वाष्प स्वेदन, जानु बस्ति, सर्वांग अभ्यंग, स्थानिक अभ्यंग, ग्रीवा बस्ति आदि पद्धति से पंचकर्म क्रिया की जा रही है। जिससे जटिल और कष्टसाध्य रोगों जैसे गठिया, स्पोंडोलाइसिस, कमरदर्द, जोड़ों का दर्द, गृध्रसी, हाथ पैरों मे सुन्न, नसों की बिमारियां, माइग्रेन इत्यादि से पीड़ित रोगियों का उपचार किया जा रहा है।
पंचकर्म क्रिया आयुर्वेदिक चिकित्सा की ऐसी पद्धति है जिसके द्वारा व्यक्ति को जटिल और कष्ट साध्य लोगों में तुरंत लाभ मिलता है यहां तक कि रोगी 100% तक स्वस्थ हो जाता है। पंचकर्म चिकित्सा का लाभ ले रहे रोगियों ने बताया कि इस पद्धति से लंबे समय से चली आ रही बीमारियों जैसे कमर दर्द, जोड़ों का दर्द, स्पांडोलाइसिस जैसी बीमारियों में बहुत लाभ मिल रहा है। अब आलम यह है कि पंचकर्म क्रिया कराने वालों की छह छह महीने तक की वेटिंग लगी हुई है।कोरोना संक्रमण को देखते हुए कोरोना गाइडलाइन का पालन करते हुए पंचकर्म क्रिया की जा रही है। यह क्रिया देशी व विदेशी सभी तरह के व्यक्तियों को अपनी ओर आकर्षित कर रही है। इसका सबसे बड़ा कारण पंचकर्म क्रिया से मिलने वाला तुरंत परिणाम है। हाल ही में राष्ट्रपिता महात्मा गांधीजी की 151वीं जन्मशती के अवसर पर राजकीय जिला आयुर्वेद चिकित्सालय बूंदी और रोगी कल्याण समिति के तत्वावधान में चल रहे सेवा सप्ताह के तहत आयोजित नि:शुल्क पंचकर्म शिविर में 315 रोगियों का पंचकर्म चिकित्सा से इलाज कराया। इस कार्य मे डॉक्टर सुनील कुशवाहा , डा.सरिता मीणा, कंपाउंडर लोकेश नारायण शर्मा, नर्स हेमलता श्रृंगी,जितैंद्र सैनी,सकरी बाई,बाली बाई अपनी सेवाएं दे रहे हैं।

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